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बही खाता(बजट) 2019

पहली पूर्णकालिक महिला वित्तमंत्री ने दो घंटे 11 मिनट तक भाषण पढ़ा और सबसे लंबे बजट भाषण देने वाले वित्त मंत्रियों में शामिल हो गईं। आजादी के बाद से अब तक 88 केंद्रीय बजट पेश किए जा चुके हैं। सबसे लंबे और सर्वाधिक समय वाले बजट भाषणों की बात करें तो पूर्व वित्तमंत्री मनमोहन सिंह, अरुण जेटली और जसवंतसिंह के नाम लिए जा सकते हैं। बजट पेश करने के लिए 2003 में तत्कालीन वित्तमंत्री जसवंत सिंह ने 2 घंटे 13 मिनट का समय लिया था।

फाल्साई रंग की सुनहरी किनारी वाली साड़ी पहने हुए वित्तमंत्री ने अपने करीब सवा दो घंटे के भाषण में एक भी बार पानी नहीं पीया। पूर्व की परंपरा को छोड़ते हुए उन्होंने ‘बही खाता’ जैसे आवरण में रखे बजट दस्तावेज निकालकर बजट भाषण दिया।

केन्‍द्रीय वित्‍त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारामन ने लोकसभा 2019-20 का केन्‍द्रीय बजट पेश करते हुए कहा कि चालू वर्ष के दौरान भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था में प्रगति होगी और यह 3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्‍यवस्‍था बन जाएगी। तथा अगले पांच वर्षों में यह 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्‍यवस्‍था बनकर प्रधानमंत्री के विजन तक पहुंच जाएगी। अब यह दुनिया में छठी सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था है। 2014 में यह 11वें स्‍थान पर थी। क्रय शक्ति की समानता के रूप में वास्‍तव में हम चीन और अमेरि‍का के बाद पहले से ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था हैं।

फरवरी 2019 में पेश 2019-20 के अंतरिम बजट की चर्चा करते हुए वित्‍त मंत्री ने सरकार की ‘दशक की परिकल्‍पना’ के 10 बिन्‍दुओं को रखा :

  1. वास्‍तविक और सामाजिक बुनियादी ढांचा तैयार करना;
  2. डिजिटल इंडिया को अर्थव्‍यवस्‍था के प्रत्‍येक क्षेत्र तक पहुंचाना;
  3. हरी-भरी धरती और नीले आकाश के साथ प्रदूषण मुक्‍त भारत;
  4. विशेषकर एमएसएमई, स्‍टार्ट-अप्‍स, रक्षा निर्माण, वाहनों, इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स, वस्‍त्रों और बैटरियों तथा चिकित्‍सा उपकरणों के साथ मेक इन इंडिया;
  5. जल, जल प्रबंधन, स्‍वच्‍छ नदियां;
  6. नीली अर्थव्‍यवस्‍था;
  7. अंतरिक्ष कार्यक्रम, गगनयान, चन्‍द्रयान और उपग्रह कार्यक्रम;
  8. खाद्यान्‍नों, दालों, तिलहनों, फलों और सब्जियों में आत्‍मनिर्भरता और निर्यात;
  9. स्‍वस्‍थ समाज – आयुष्‍मान भारत, अच्‍छी तरह से पोषित महिला और बच्‍चा। नागरिकों की सुरक्षा;
  10. जन भागीदारी के साथ टीम इंडिया। न्‍यूनतम सरकार अधिकतम शासन।

सरकार की अगले पांच वर्षों में बुनियादी ढांचे में इच्‍छा 100 लाख करोड़ रुपये निवेश करना, 2019-20 में एक लाख 5 हजार करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्‍य को बढ़ाना, क्रेडिट को बढ़ावा देने के लिए पीएसबी को 70 हजार करोड़ रुपये उपलब्‍ध कराने का प्रस्‍ताव, अंतिम पांच वर्षां में खाद्य सुरक्षा बजट को दोगुना करना, 10 हजार करोड़ रुपये के खर्च से विद्युत वाहनों को तेजी से अपनाना, अफ्रीका में 18 नए भारतीय दूतावास मिशन खोलना,‍विश्‍वस्‍तरीय पर्यटन स्‍थलों में 17 महत्‍वपूर्ण पर्यटन स्‍थलों का विकास तथा 1,2,5,10 और 20 रुपये के सिक्‍कों की नई श्रृंखला जारी करना केन्‍द्रीय वित्‍त और कॉरपोरेट मामलों के मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारामन द्वारा संसद में पेश केन्‍द्रीय बजट 2019-20 की कुछ प्रमुख बातें हैं।

संपर्क सेवाओँ को अर्थव्यवस्था की धमनी बताते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, औद्योगिक गलियारों, समर्पित माल भाड़ा गलियारों, भारतमाला और सागरमाला परियोजनाओं,जलमार्ग विकास और उड़ान योजनाओं के जरिए भौतिक संपर्क के सभी माध्यमों को काफी बढ़ावा दिया है। औद्योगिक गलियारों के बनने से उद्योग की संभावना वाले क्षेत्रों में अपेक्षाकृत अधिक औद्योगिक निवेश के लिए अवसंरचना का विकास बेहतर होगा, समर्पित माल भाड़ा गलियारों से हमारे रेल नेटवर्क पर बोझ घटेगा जिससे आम आदमी को लाभ होगा। भारतमाला के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम से राष्ट्रीय सड़क गलियारों और राजमार्गों के विकास में मदद मिलेगी, जबकि सागरमाला से बंदरगाहों को जोड़ने और उनके आधुनिकीकरण में मदद मिलेगी जिससे बंदरगाह उद्योग फले-फूलेगा। यदि सागरमाला का उद्देश्य विदेशी व्यापार के लिए अवसंरचना में सुधार लाना है तो यह समान रूप से गरीब आदमी की परिवहन व्यवस्था भी है। जलमार्ग परिवहन आवागमन का एक सस्ता साधन साबित हुआ है। राष्ट्रीय जलमार्गों पर नौवहन की क्षमता बढ़ाने के लिए जल मार्ग विकास परियोजना का उद्देश्य जल परिवहन के जरिए आंतरिक व्यापार को बढ़ावा देना है। इस पहलों से परिवहन की लागत कम होगी, घरेलू उत्पाद ज्यादा प्रतिस्पर्धी होंगे और लॉजिस्टिक सेवाओं में काफी सुधार आएगा।

वित्त मंत्री ने कहा कि दुनिया के तीसरे सबसे बड़े घरेलू उड्डयन बाजार के रूप में अब भारत के लिए विमानन क्षेत्र के वित्त पोषण और जहाजों को पट्टे पर देने की गतिविधियों में शामिल होने का समय आ गया है। श्रीमती सीतारामन ने कहा कि देश में रखरखाव और मरम्मत से जुड़े विमानन उद्योग (एमआरओ) के लिए बेहतर कारोबारी माहौल उपलब्ध कराने तथा इसमें आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए इंजीनियरिंग के क्षेत्र में भारत की क्षमताओँ का लाभ उठाने का प्रस्ताव किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार एमआरओ क्षेत्र के विकास के लिए अनुकूल नीतियां बनाएंगी।

वित्त मंत्री ने बताया कि मंत्रिमंडल के अनुमोदन के पश्चात् 3 वर्ष की अवधि के लिए 10,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ फेम (एफएमई) योजना, फेस-II 2019 की शुरुआत 1 अप्रैल, 2019 को की गई। इस योजना का मुख्य उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद के लिए प्रोत्साहन की पेशकश तथा उनके लिए जरूरी चार्जिंग अवसंरचना स्थापित कर ऐसे वाहनों के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना है। इस योजना के अंतर्गत केवल उन्नत बैटरी वाले और पंजीकृत ई-वाहनों को ही प्रोत्साहन दिया जाएगा।

infrastructure development

श्रीमती सीतारामन ने रेलवे का उल्लेख करते हुए कहा कि 2018-2030 के बीच रेल अवसंरचना विकास के लिए 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश की आवश्यकता होगी। इसे देखते हुए रेलवे का पूंजी परिव्यय प्रति वर्ष 1.5 से 1.6 लाख करोड़ रुपये रखा गया है। उन्होने कहा कि सभी मंजूर परियोजनाएं पूरी करने में कई दशक लग जाएंगे। अतः यह प्रस्ताव किया जाता है कि पटरियां बिछाने, रेलिंग स्टाफ विनिर्माण तथा यात्री मालभाड़ा सेवाओं की सुपुर्दगी के लिए सरकारी निजी भागीदारी का इस्तेमाल किया जाए।

वित्त मंत्री ने बताया कि कनेक्टिविटी अवसंरचना को अगले स्तर पर ले जाने के लिए एक देश, एक ग्रिड – जिससे सभी राज्यों को किफायती दरों पर बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है, उन्होंने आगे कहा कि इस सफल बिजली कनेक्टिविटी मॉडल को अपनाएंगे। वित्त मंत्री ने गैस ग्रिड, जल ग्रिड, आई-वे और क्षेत्रीय हवाई अड्डों के विकास के लिए इस वर्ष एक ब्ल्यूप्रिंट लाने का प्रस्ताव पेश किया।

बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि लोगों की जरबदस्त प्रतिक्रिया से उत्साहित होकर भारत सरकार ने प्रधानमंत्री करम योगी मानधन योजना नामक नई स्कीम के अंतर्गत 1.5 करोड़ रुपये से कम वार्षिक कारोबार करने वाले लगभग 3 करोड़ खुदरा व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को पेंशन लाभ देने का निर्णय लिया है।

industrial development

बजट पेश करते हुए यह भी बताया कि निवेश प्रेरित विकास के लिए कम लागत वाली पूंजी सुलभ होने की आवश्यकता है। यह अनुमान है कि भारत को प्रतिवर्ष औसत 20 लाख करोड़ रुपये (प्रतिवर्ष 300 बिलियन अमरीकी डॉलर) के निवेश की आवश्यकता है। वित्त मंत्री ने अवसंरचना के वित्तपोषण के लिए पूंजी स्रोत बढ़ाने के लिए कई उपाय किए जाने का प्रस्ताव पेश किया जिसके अंतर्गत निम्नलिखित बातें शामिल हैं :

  1. ऋण गांरटी संवर्धन निगम जिसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विनियम अधिसूचित किए गए हैं, को 2019-20 में अधिसूचित किया जाएगा।
  2. अवसंरचना क्षेत्र पर विशेष ध्यान केन्द्रित करते हुए कॉरपोरेट, क्रेडिट डिफाल्टट स्वैप सहित दीर्घाविधिक बॉन्डों के लिए बाजार को मजबूती प्रदान करने हेतु एक योजना लाई जाएगी।

बजट पेश करते हुए यह भी बताया कि वैश्विक विदेशी प्रत्यक्ष निवेश प्रवाह 2018 में 13 प्रतिशत गिरकर पिछले वर्ष के 1.5 ट्रिलियन अमरीकी डॉलर से 1.3 ट्रिलियन अमरीकी डॉलर पर आ गया। यूएनसीटीएडी के विश्व निवेश रिपोर्ट 2019 के अनुसार यह तीसरी लगातार वार्षिक गिरावट थी। 2018-19 में भारत का विदेशी प्रत्यक्ष निवेश अंतर्वाह 64.375 बिलियन अमरीकी डॉलर पर मजबूत रहा। इसमें पिछले वर्ष की तुलना में 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

वित्त मंत्री ने बजट भाषण के दौरान बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की उज्ज्वला योजना और सौभाग्य योजना नामक दो प्रमुख पहलों ने प्रत्येक ग्रामीण परिवार के जीवन को बदल दिया है, उनके जीवन को आसान बनाने में नाटकीय सुधार आया है। स्वच्छ रसोई गैस की परिवार को सुलभता में, 7 करोड़ से अधिक एलपीजी कनेक्शन देने की व्यवस्था के जरिए अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। सभी गांव और देशभर में लगभग 100 प्रतिशत को बिजली प्रदान की गई है। वित्त मंत्री ने भारत को अधिक आकर्षक विदेशी प्रत्यक्ष निवेश का गंतव्य स्थान बनाने के लिए इस आय को और अधिक समेक्षित करने का प्रस्ताव भी रखा।

  1. सरकार विमानन, मीडिया (एनिमेशन, एवीजीसी) और बीमा क्षेत्रों को एफडीआई के लिए और अधिक खोलने के सुझावों पर विचार करेंगी। इसके लिए सभी हितधारकों के साथ विचार-विमर्श किया जाएगा।
  2. बीमा मध्यस्थता कम्पनियों में 100 प्रतिशत विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) अनुमति दी जाएगी।
  3. एकल ब्रांड रिटेल में एफडीआई के लिए स्थानीय आपूर्ति नियमों को आसान बनाया जाएगा।

आगे उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण का लक्ष्य 2022 तक सबके लिए आवास के उद्देश्य को हासिल करना है। पिछले पांच वर्षों में कुल 1.54 करोड़ ग्रामीण घर पूरे किए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पीएमएवाई-जी के दूसरे चरण में, 2019-20 से 2021-22 के दौरान, पात्र लाभार्थियों को 1.95 करोड़ आवास मुहैया कराने का प्रस्ताव है। ये आवास, शौचालय, बिजली और एलपीजी कनेक्शन जैसी सुविधाओं के साथ दिए जा रहे हैं। प्रौद्योगिकी प्रत्यक्ष लाभ अंतरण मंच और प्रौद्योगिकी निविष्टियों के उपयोग से आवासों को पूरा करने हेतु दिनों की औसत संख्या 2015-16 में 3014 दिनों से घटाकर 2017-18 में 114 दिन कर दी गई हैं।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से ग्रामीण क्षेत्रों को बहुत से सामाजिक-आर्थिक लाभ मिले हैं। पात्र और व्‍यवहार्य बस्तियों को जोड़ने के लक्ष्‍य को 2022 से पहले 2019 में पूरा करना तय किया गया है, क्‍योंकि ऐसी 97 प्रतिशत बस्तियों को हर मौसम में संपर्कता प्रदान की गई है। ऐसा पिछले 1000 दिनों में तेज गति से प्रति दिन 130 से 133 किलोमीटर सड़क निर्माण के कारण संभव हुआ है। वित्‍त मंत्री ने कहा कि पीएमजीएसवाई-III 80,250 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से अगले पांच वर्षों में 1,2500 किलोमीटर सड़क को अपग्रेड करने की परिकल्‍पना की गई है।

प्रधानमंत्री मत्‍स्‍य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के माध्‍यम से मत्‍स्‍य विभाग एक मजबूत मत्‍स्‍य ढांचे की स्‍थापना करेगा।

वित्‍त मंत्री ने कहा कि भारत में जल सुरक्षा सुनिश्चित करना और सभी देशवासियों के लिए शुद्ध और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। श्रीमती सीतारामन ने कहा कि जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय और पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय को आपस में जोड़कर जल शक्ति मंत्रालय बनाना इस दिशा में एक प्रमुख कदम है। यह नया मंत्रालय एक समन्वित और समग्र रूप से हमारे जल संसाधनों के प्रबंधन और जल आपूर्ति की देखरेख करेगा। साथ ही जल जीवन मिशन के तहत 2024 तक सभी ग्रामीण परिवारों के लिए ‘हर घर जल’ (पाइप द्वारा जल आपूर्ति) सुनिश्चित करने के लिए राज्यों के साथ मिलकर काम करेगा। सरकार ने ‘जल शक्ति अभियान’ के लिए 256 जिलों के ऐसे 1592 ब्लॉकों की पहचान की है, जहां जल का संकट है।

प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान के अंतर्गत अभी तक 2 करोड़ से अधिक ग्रामीणों को डिजिटल रूप से साक्षर बनाया गया है। श्रीमती निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार स्‍टार्ट-अप के लिए विशेष रूप से डीडी चैनल शुरू करने का प्रस्‍ताव कर रही है।

प्रधानमंत्री आवास योजना- शहरी (पीएमएवाई-शहरी) के अंतर्गत लगभग 4.83 लाख करोड़ रुपए के निवेश से 81 लाख से अधिक आवासों के निर्माण की मंजूरी दी गई है, जिसमें से लगभग 47 लाख आवासों का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। 26 लाख से अधिक आवासों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, जिसमें से लगभग 24 लाख आवास लाभार्थियों को दिए जा चुके हैं। इन आवासों के निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर नई प्रौद्योगिकियों को अपनाया गया है। इन प्रौद्योगिकियों के इस्‍तेमाल से अभी तक 13 लाख से अ‍धिक आवासों का निर्माण किया गया है।

बजट में शिक्षा को बेहतर करने के लिए नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लाने से लेकर SWAYAM योजना तक की बात हुई। सरकार ‘वर्ल्ड क्लास इंस्टिट्यूशन’ के तहत वित्त वर्ष 2019-20 के लिए 400 करोड़ रुपये उपलब्ध कराएगी। साथ ही वित्त मंत्री ने ‘स्टडी इन इंडिया’ नाम का कार्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव भी रखा जिससे ज्यादा से ज्यादा विदेशी छात्र भारत में पढ़ने आएं। सरकार देश में रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए नेशनल रिसर्च फाउंडेशन बनाएगी। ये एक ऐसा प्लेटफॉर्म साबित का होगा जहां शोध और इनोवेशन से जुड़े कार्यों को बढ़ावा दिया जाएगा जिसकी वजह से भविष्य में रिसर्च के क्षेत्र में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में बढ़ोतरी होगी। सरकार कृत्रिम बुद्धिमत्‍ता (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) (एआई), कम्‍प्‍यूटर संबंधी उपकरण, बिग डाटा, 3डी प्रिन्टिंग, आभासी वास्‍तविकता और रॉबर्ट विज्ञान जैसे नये युग के कौशलों पर भी ध्‍यान देगी,जिसकी देश और विदेश में काफी मांग है और ये काफी ज्‍यादा पारिश्रमिक भी प्रदान करते हैं।

श्रीमती सीतारामन ने कहा कि सरकार ने मुद्रा, स्‍टैंडअप इंडिया एवं स्‍वयं सहायता समूह कार्यक्रमों जैसी विभिन्‍न योजनाओं के जरिये महिला उद्यमिता में सहायता दी है और महिला उद्यम को बढ़ावा दिया है। सभी जिलों में महिला स्‍व-सहायता समूह जेसे हितकारी कार्यक्रमों का विस्‍तार करने का प्रस्‍ताव है। इसके अलावा जन-धन बैंक खाताधारक प्रत्‍येक सत्‍यापित महिला स्‍व-सहायता समूह सदस्‍य को 5,000 रुपये के ओवरड्राफ्ट की अनुमति होगी। प्रत्‍येक स्‍व-सहायता समूह में एक महिला को मुद्रा योजना के अंतर्गत 1,00,000 रुपये तक ऋण उपलब्‍ध कराया जाएगा।

वित्‍त मंत्री ने कहा कि सरकार 17 प्रतिष्ठित पर्यटन स्‍थलों को विश्‍व स्‍तरीय पर्यटन स्‍थल के रूप में विकसित कर रही है, जो अन्‍य पर्यटन स्‍थलों के लिए एक मॉडल के रूप में कार्य करेंगे। ये प्रतिष्ठित पर्यटन स्‍थल सैलानियों को बेहतर अनुभव प्रदान करेंगे, जिससे इन स्‍थलों पर देशी और विदेशी दोनों पर्यटक बड़ी संख्‍या में आएंगे।

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