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गेटवे ऑफ़़ इंडिया’ का इतिहास, तथ्य

गेट वे ऑफ इंडिया ( Gateway of India) भारत की आर्थिक राजधानी मुम्‍बई (Financial capital Mumbai) में स्थित एक द्वार है जो मुम्बई में होटल ताज के ठीक सामने स्थित है।

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यह स्मारक साउथ मुंबई के अपोलो बन्दर क्षेत्र में अरब सागर के बंदरगाह पर स्थित है। यह एक बड़ा सा द्वार है जिसकी उंचाई 26 मीटर (85 फीट) है। अरब सागर के समुद्री मार्ग से आने वाले जहाजों आदि के लिए यह भारत का द्वार कहलाता है

पिछले समय में गेटवे ऑफ़ इंडिया का उपयोग पश्चिम से आने वाले अतिथियों के लिए आगमन बिन्‍दु के रूप में होता था।

इतिहास

वास्तुकला के हिंदू और मुस्लिम दोनों प्रकारों को ध्यान में रखते हुए गेटवे ऑफ़ इंडिया की आधारशिला बम्‍बई (मुम्‍बई) के राज्‍य पाल द्वारा 31 मार्च 1913 को रखी गई थी। इसका निर्माण किंग जॉर्ज पंचम और क्वीन मैरी के आगमन के लिए किया गया था।यह स्‍मारक 26 मीटर ऊंचा है और इसमें 4 मीनारें हैं और पत्‍थरों पर खोदी गई बारीक पच्‍चीकारी है।

गेटवे ऑफ इंडिया पीले बेसाल्ट और कंक्रीट से बनाया गया था। 1915 और 1919 के बीच अपोलो बुंदर (पोर्ट) पर काम शुरू हुआ जहां पर गेटवे ऑफ इंडिया और नए समुद्री दीवार का निर्माण किया गया। गेटवे ऑफ इंडिया की नींव का काम 1920 में पूरा किया गया था और निर्माण 1924 में समाप्त हो गया था। गेटवे ऑफ इंडिया 4 दिसंबर, 1924 को वायसराय द्वारा खोला गया।

इसका केवल गुम्‍बद निर्मित करने में 21 लाख रु. का खर्च आया था। यह भारतीय – सार्सैनिक शैली में निर्मित भवन है, जबकि इसकी वास्तुकला में गुजराती शैली का भी कुछ प्रभाव दिखाई देता है। यह पेरिस में स्थित आर्क डी ट्रायम्‍फ की प्रतिकृति है। इसके वास्तुशिल्पी जॉजॅ विंटैट थे। यह सन् 1924 में बन कर तैयार हुआ।

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